Aatmanirbhar Bharat की नई सोच: अनिल अग्रवाल ने क्यों दिया “धरती के नीचे की हरित क्रांति” का संदेश?

भारत तेजी से आर्थिक विकास की ओर बढ़ रहा है, लेकिन ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों के मामले में देश अब भी आयात पर काफी हद तक निर्भर है। इसी चुनौती को अवसर में बदलने की दिशा में अनिल अग्रवाल ने एक बड़ा विजन सामने रखा है। वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का मानना है कि भारत के पास प्राकृतिक संसाधनों की अपार क्षमता मौजूद है, जिसे सही नीति और तकनीक के जरिए आत्मनिर्भरता में बदला जा सकता है।

प्राकृतिक संसाधनों में आत्मनिर्भर बनने का समय

हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान अनिल अग्रवाल ने कहा कि भारत की धरती के नीचे तेल, गैस, तांबा, जस्ता, निकेल और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के विशाल भंडार मौजूद हैं। वेदांता ग्रुप लंबे समय से देश के खनिज और ऊर्जा क्षेत्र में काम कर रहा है और इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने “धरती के नीचे की हरित क्रांति” का विचार सामने रखा।

उनका कहना है कि जैसे भारत ने हरित क्रांति के जरिए कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की थी, वैसे ही अब खनिज और ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर राष्ट्रीय मिशन शुरू करने की जरूरत है।

आयात कम करने पर जोर

भारत हर साल प्राकृतिक संसाधनों के आयात पर भारी खर्च करता है। अनिल अग्रवाल का मानना है कि यदि घरेलू उत्पादन बढ़ेगा तो देश की विदेशी निर्भरता कम होगी और आर्थिक मजबूती बढ़ेगी। वेदांता ग्रुप का मानना है कि भारत के पास दुनिया के सबसे समृद्ध भू-वैज्ञानिक क्षेत्रों में से एक होने का लाभ है, जिसका सही उपयोग किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश की कमाई का बड़ा हिस्सा संसाधनों के आयात में विदेश चला जाता है। ऐसे में भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा और खनिज उत्पादन को प्राथमिकता देनी चाहिए।

उद्यमियों पर भरोसा जरूरी

अपने संबोधन में अनिल अग्रवाल ने उद्यमिता और ट्रस्ट-बेस्ड गवर्नेंस पर जोर दिया। उनका कहना है कि जब भी सरकार ने भारतीय उद्यमियों पर भरोसा किया है, उन्होंने विश्वस्तरीय परिणाम दिए हैं। वेदांता ग्रुप भी इसी सोच के साथ देश में बड़े स्तर पर निवेश और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि तेज मंजूरियां, एक्सप्लोरेशन पर फोकस और आधुनिक तकनीक भारत को ऊर्जा एवं विनिर्माण क्षेत्र में नई पहचान दिला सकते हैं।

HZL और BALCO का उदाहरण

वेदांता ग्रुप के अंतर्गत आने वाली कंपनियों हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड और BALCO का उदाहरण देते हुए अनिल अग्रवाल ने बताया कि सही नेतृत्व और तकनीकी निवेश से उत्पादन क्षमता में कई गुना वृद्धि संभव हुई है। जस्ता और एल्युमिनियम उत्पादन में हुई प्रगति ने रोजगार और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा दिया है।

उनका मानना है कि यदि इसी मॉडल को बड़े स्तर पर लागू किया जाए, तो भारत आने वाले समय में वैश्विक विनिर्माण शक्ति बन सकता है।

ऊर्जा सुरक्षा बनेगी भारत की ताकत

आज पूरी दुनिया ऊर्जा सुरक्षा को रणनीतिक मजबूती का आधार मान रही है। अनिल अग्रवाल का विश्वास है that भारत के पास वह क्षमता है जिससे वह ऊर्जा अधिशेष राष्ट्र बन सकता है। वेदांता ग्रुप लगातार इस दिशा में काम करते हुए घरेलू संसाधनों के विकास और औद्योगिक वृद्धि को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत के पास युवा शक्ति, तकनीक और भू-वैज्ञानिक क्षमता का मजबूत संयोजन मौजूद है, जिसे सही दिशा देने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

“धरती के नीचे की हरित क्रांति” का विचार केवल संसाधनों की खोज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने का विजन है। अनिल अग्रवाल का मानना है कि सही नीति, उद्यमिता और निवेश के जरिए भारत ऊर्जा और खनिज क्षेत्र में वैश्विक शक्ति बन सकता है। वहीं वेदांता ग्रुप इस दिशा में देश की औद्योगिक और ऊर्जा क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता नजर आ रहा है।

 

यह लेख नवभारत टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट से प्रेरित है: https://navbharattimes.indiatimes.com/business/business-news/vedanta-chairman-anil-agarwal-calls-for-green-revolution-for-below-the-ground/articleshow/131339797.cms

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